Breaking News

News (खबरीलाल न्यूज़) : USMCA पर भी असर! ट्रंप ने कनाडा के सामान पर लगाया 50% टैरिफ, कनाडा ने दी कड़ी प्रतिक्रिया:

post


khabrilal

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले अधिकांश सामान पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह फैसला कनाडा द्वारा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार के जवाब में लिया गया है। इस घोषणा के बाद उत्तर अमेरिकी व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ गई है।

19 अगस्त से लागू होगा नया टैरिफ

व्हाइट हाउस के अनुसार, नया टैरिफ 19 अगस्त से प्रभावी होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने 1930 के ट्रेड एक्ट की धारा 338 के तहत तीन कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और आवश्यक खनिजों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है, क्योंकि इन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें उन वस्तुओं को भी शामिल किया गया है, जिन्हें पहले यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के तहत शुल्क में छूट मिली हुई थी। अमेरिका ने 2020 में लागू इस व्यापार समझौते को आगे नहीं बढ़ाया है, जिससे भविष्य में दोनों देशों के बीच लंबी व्यापार वार्ता की संभावना बन गई है।

कनाडा ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ट्रंप के फैसले पर कनाडा की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कहा कि यदि अमेरिका यह टैरिफ लागू करता है, तो कनाडा भी "डॉलर के बदले डॉलर" और "टैरिफ के बदले टैरिफ" की नीति अपनाएगा।

वहीं, कैनेडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोनों देशों से अगले 30 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत विफल रहती है तो यह विवाद पूर्ण व्यापार युद्ध (ट्रेड वॉर) में बदल सकता है।

महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इससे अमेरिका में आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं और महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका है। इसका प्रभाव वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में नए टैरिफ वैश्विक आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

कानूनी रास्ते का सहारा

इसी वर्ष फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल घोषित कर सीधे टैरिफ लागू नहीं कर सकते। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 1930 के ट्रेड एक्ट की धारा 338 का इस्तेमाल करते हुए यह नया कदम उठाया है।



khabrilal

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले अधिकांश सामान पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह फैसला कनाडा द्वारा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार के जवाब में लिया गया है। इस घोषणा के बाद उत्तर अमेरिकी व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ गई है।

19 अगस्त से लागू होगा नया टैरिफ

व्हाइट हाउस के अनुसार, नया टैरिफ 19 अगस्त से प्रभावी होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने 1930 के ट्रेड एक्ट की धारा 338 के तहत तीन कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और आवश्यक खनिजों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है, क्योंकि इन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें उन वस्तुओं को भी शामिल किया गया है, जिन्हें पहले यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के तहत शुल्क में छूट मिली हुई थी। अमेरिका ने 2020 में लागू इस व्यापार समझौते को आगे नहीं बढ़ाया है, जिससे भविष्य में दोनों देशों के बीच लंबी व्यापार वार्ता की संभावना बन गई है।

कनाडा ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ट्रंप के फैसले पर कनाडा की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने कहा कि यदि अमेरिका यह टैरिफ लागू करता है, तो कनाडा भी "डॉलर के बदले डॉलर" और "टैरिफ के बदले टैरिफ" की नीति अपनाएगा।

वहीं, कैनेडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दोनों देशों से अगले 30 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत विफल रहती है तो यह विवाद पूर्ण व्यापार युद्ध (ट्रेड वॉर) में बदल सकता है।

महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इससे अमेरिका में आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं और महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका है। इसका प्रभाव वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में नए टैरिफ वैश्विक आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

कानूनी रास्ते का सहारा

इसी वर्ष फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति आर्थिक आपातकाल घोषित कर सीधे टैरिफ लागू नहीं कर सकते। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 1930 के ट्रेड एक्ट की धारा 338 का इस्तेमाल करते हुए यह नया कदम उठाया है।


...
...
...
...
...
...
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner