
देशभर में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बफर स्टॉक जारी करने और बड़े शहरों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज के थोक भाव में तेजी देखी जा रही है।
3 सितंबर को लासलगांव मंडी में प्याज का औसत भाव 4450 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि अधिकतम कीमत 4930 रुपये रही। यानी थोक बाजार में प्याज करीब 44 से 49 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। खुदरा बाजार में यही प्याज 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
सरकारी बफर स्टॉक के बावजूद महंगाई पर सवाल
महंगाई पर नियंत्रण के लिए नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद मंडियों और खुदरा बाजारों में कीमतों में बढ़ोतरी ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भंडारण में खराब हो रहा किसानों का प्याज
इस बीच प्याज के भंडारण को लेकर भी किसानों की परेशानी बढ़ गई है। लंबे समय तक स्टोरेज में रखे प्याज का वजन कम होने के साथ उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। किसानों का कहना है कि बढ़ी हुई मंडी कीमतों का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता, क्योंकि भंडारण और रखरखाव में होने वाला नुकसान उनकी कमाई को प्रभावित करता है।
किसानों की मांग है कि सरकार केवल बाजार भाव नियंत्रित करने पर ध्यान देने के बजाय वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था और दीर्घकालिक कृषि नीति पर भी ठोस कदम उठाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ मिल सके।

देशभर में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बफर स्टॉक जारी करने और बड़े शहरों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज के थोक भाव में तेजी देखी जा रही है।
3 सितंबर को लासलगांव मंडी में प्याज का औसत भाव 4450 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि अधिकतम कीमत 4930 रुपये रही। यानी थोक बाजार में प्याज करीब 44 से 49 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। खुदरा बाजार में यही प्याज 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
सरकारी बफर स्टॉक के बावजूद महंगाई पर सवाल
महंगाई पर नियंत्रण के लिए नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद मंडियों और खुदरा बाजारों में कीमतों में बढ़ोतरी ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भंडारण में खराब हो रहा किसानों का प्याज
इस बीच प्याज के भंडारण को लेकर भी किसानों की परेशानी बढ़ गई है। लंबे समय तक स्टोरेज में रखे प्याज का वजन कम होने के साथ उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। किसानों का कहना है कि बढ़ी हुई मंडी कीमतों का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाता, क्योंकि भंडारण और रखरखाव में होने वाला नुकसान उनकी कमाई को प्रभावित करता है।
किसानों की मांग है कि सरकार केवल बाजार भाव नियंत्रित करने पर ध्यान देने के बजाय वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था और दीर्घकालिक कृषि नीति पर भी ठोस कदम उठाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ मिल सके।








Journalist खबरीलाल








