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News Lucknow:: 11 सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा चुनाव के लिए हलचल तेज हो गई है :

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 लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा चुनाव के लिए हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने जहां 3 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अभी नामों पर मंथन में जुटी है। 8 सीटों के लिए पार्टी 20 नामों पर विचार कर रही है। हालांकि, सपा की ओर से चले गए जाट दांव से पार्टी के लिए माथापच्ची कुछ बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जयंत चौधरी को सपा-रालोद गठबंधन की ओर से उतारे जाने के बाद भगवा कैंप पर भी जाटलैंड से किसी चेहरे को उच्च सदन में भेजने का दबाव बढ़ गया है। विधानसभा चुनाव में अखिलेश और जयंत की जोड़ी ने भाजपा का गढ़ बन चुके पश्चिमी यूपी में चुनौती बढ़ा दी थी। किसान आंदोलन से प्रभावित रहे गन्ना बेल्ट में भले ही बीजेपी एक बार फिर मिठास चखने में सफल रही, लेकिन कई सीटों पर उसे जोरदार झटका लगा और गन्ना मंत्री सुरेश राणा तक चुनाव हार गए। हालांकि, पार्टी ने वेस्ट यूपी के प्रभावशाली समुदाय को साधने के लिए योगी मंत्रिमंडल में 3 जाट चेहरों को जगह दी। बागपत जिले के बड़ौत से जीते विधायक केपी मलिक, मथुरा से जीतकर आए लक्ष्मीनारायण और मुरादाबाद से भूपेंद्र चौधरी को मंत्री बनाया गया।

अखिलेश ने फेंका 2024 का पासा
पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में वैसे तो विधानसभा चुनाव के दौरान सपा-रालोद गठबंधन का शोर सीटों में नहीं बदला। मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली जिले में ही गठबंधन प्रभावी दिखा। वेस्ट यूपी के 14 जिलों में भाजपा ने 70 सीटों में से 40 सीटों पर जीत दर्ज की। अब सपा ने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने का फैसला कर 2024 को लेकर पासा फेंका है। हालांकि यह कहना बहुत मुश्किल है कि 2024 तक यह गठबंधन कितना कारगर रहेगा। राजनीतिक जानकारों की मानें तो सपा जयंत को राज्यसभा भेजकर समुदाय के सम्मान के रूप में पेश करेगी और भाजपा इस नैरेटिव में पीछे रहा पसंद नहीं करेगी। इसलिए पार्टी में जाट चेहरों पर भी मंथन चल रहा है।


जाट-मुस्लिम समीकरण साधने की उम्मीद
चौधरी चरण सिंह के समय में वेस्ट यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण काम करता था। जो धीरे-धीरे टूट गया, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में यह समीकरण बनता दिखा और इसी का नतीजा रहा कि रालोद एक सीट से आठ पर पहुंच गया। इनमें से छह सीटों पर 2017 में भाजपा जीती थी। इसी समीकरण को 2024 में दोहराने की उम्मीद और जाट मुस्लिम समीकरण के सहारे सपा-रालोद गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा के सामने चुनौती खड़ा कर सकता है।


गठबंधन की एक शर्त राज्यसभा चुनाव भी थे
हालिया विधानसभा चुनाव में रालोद के आठ विधायक हैं। इसमें से तीन विधायक सपा के हैं। ये सभी रालोद के सिंबल पर जीते हैं। कपिल सिब्बल को प्रत्याशी बनाते ही सियासत में गठबंधन को लेकर सवाल उभरने लगे थे। रालोद में निराशा थी क्योंकि गठबंधन से पहले ही एक शर्त राज्यसभा चुनाव भी थे। आखिरकार गुरुवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2024 को देखते हुए जयंत चौधरी को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाने का ऐलान कर दिया। वो भी अपनी पत्नी डिंपल की जगह।



 लखनऊ, उत्तर प्रदेश में 11 सीटों पर होने जा रहे राज्यसभा चुनाव के लिए हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने जहां 3 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अभी नामों पर मंथन में जुटी है। 8 सीटों के लिए पार्टी 20 नामों पर विचार कर रही है। हालांकि, सपा की ओर से चले गए जाट दांव से पार्टी के लिए माथापच्ची कुछ बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जयंत चौधरी को सपा-रालोद गठबंधन की ओर से उतारे जाने के बाद भगवा कैंप पर भी जाटलैंड से किसी चेहरे को उच्च सदन में भेजने का दबाव बढ़ गया है। विधानसभा चुनाव में अखिलेश और जयंत की जोड़ी ने भाजपा का गढ़ बन चुके पश्चिमी यूपी में चुनौती बढ़ा दी थी। किसान आंदोलन से प्रभावित रहे गन्ना बेल्ट में भले ही बीजेपी एक बार फिर मिठास चखने में सफल रही, लेकिन कई सीटों पर उसे जोरदार झटका लगा और गन्ना मंत्री सुरेश राणा तक चुनाव हार गए। हालांकि, पार्टी ने वेस्ट यूपी के प्रभावशाली समुदाय को साधने के लिए योगी मंत्रिमंडल में 3 जाट चेहरों को जगह दी। बागपत जिले के बड़ौत से जीते विधायक केपी मलिक, मथुरा से जीतकर आए लक्ष्मीनारायण और मुरादाबाद से भूपेंद्र चौधरी को मंत्री बनाया गया।

अखिलेश ने फेंका 2024 का पासा
पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में वैसे तो विधानसभा चुनाव के दौरान सपा-रालोद गठबंधन का शोर सीटों में नहीं बदला। मेरठ, मुजफ्फरनगर और शामली जिले में ही गठबंधन प्रभावी दिखा। वेस्ट यूपी के 14 जिलों में भाजपा ने 70 सीटों में से 40 सीटों पर जीत दर्ज की। अब सपा ने रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजने का फैसला कर 2024 को लेकर पासा फेंका है। हालांकि यह कहना बहुत मुश्किल है कि 2024 तक यह गठबंधन कितना कारगर रहेगा। राजनीतिक जानकारों की मानें तो सपा जयंत को राज्यसभा भेजकर समुदाय के सम्मान के रूप में पेश करेगी और भाजपा इस नैरेटिव में पीछे रहा पसंद नहीं करेगी। इसलिए पार्टी में जाट चेहरों पर भी मंथन चल रहा है।


जाट-मुस्लिम समीकरण साधने की उम्मीद
चौधरी चरण सिंह के समय में वेस्ट यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण काम करता था। जो धीरे-धीरे टूट गया, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में यह समीकरण बनता दिखा और इसी का नतीजा रहा कि रालोद एक सीट से आठ पर पहुंच गया। इनमें से छह सीटों पर 2017 में भाजपा जीती थी। इसी समीकरण को 2024 में दोहराने की उम्मीद और जाट मुस्लिम समीकरण के सहारे सपा-रालोद गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा के सामने चुनौती खड़ा कर सकता है।


गठबंधन की एक शर्त राज्यसभा चुनाव भी थे
हालिया विधानसभा चुनाव में रालोद के आठ विधायक हैं। इसमें से तीन विधायक सपा के हैं। ये सभी रालोद के सिंबल पर जीते हैं। कपिल सिब्बल को प्रत्याशी बनाते ही सियासत में गठबंधन को लेकर सवाल उभरने लगे थे। रालोद में निराशा थी क्योंकि गठबंधन से पहले ही एक शर्त राज्यसभा चुनाव भी थे। आखिरकार गुरुवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2024 को देखते हुए जयंत चौधरी को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाने का ऐलान कर दिया। वो भी अपनी पत्नी डिंपल की जगह।



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