2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी, लेकिन अब कांग्रेस केवल छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ही सत्ता में है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में हुई टूट के बाद भाजपा ने वहां पर अपनी सरकार बना ली है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा को विभिन्न स्तरों से जो अनुमान मिले हैं, उनके अनुसार छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश उसके लिए काफी कठिनाई भरे हो सकते हैं। मध्य प्रदेश में हाल में स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा को को झटका भी लगा है। छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार को बीते चार साल में कोई बड़ी चुनौती नहीं दे सकी है। भाजपा वहां पर प्रभावी नेतृत्व के संकट से भी जूझ रही है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए अपनी अलग रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके तहत पार्टी ने पूर्वोत्तर में संगठन में काम कर रहे अजय जामवाल को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का क्षेत्रीय संगठन मंत्री नियुक्त किया है और उनका केंद्र रायपुर रखा गया है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में भाजपा ने सवा साल बाद ही अपनी सरकार बना ली थी, क्योंकि कांग्रेस में ज्योतिराज सिंधिया के नेतृत्व में बड़ी टूट होने से कमलनाथ सरकार का पतन हो गया था। उसके बाद भाजपा को हाल में नगर निगम और स्थानीय निकाय के चुनाव में काफी झटका भी लगा है, जबकि 16 में से 5 नगर निगम के मेयर उसके हाथ से निकल गए। इनमें ग्वालियर चंबल क्षेत्र भी शामिल है, जहां उसके कई दिग्गज नेता हैं। इसके अलावा महाकौशल में भी उसे झटका लगा है, जो कांग्रेस नेता कमलनाथ का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।
भाजपा के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से भी ज्यादा मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि वहां पर कांग्रेस की सरकार को बीते 4 साल में पार्टी कोई चुनौती देती हुई नहीं दिखी है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का पहले पहले जैसा प्रभाव नहीं रहा, लेकिन इस बीच भाजपा कोई नया नेतृत्व भी नहीं उभार सकी है। राज्य की लगभग आधी आबादी पिछड़ा वर्ग की है, लेकिन यहां पर आदिवासी समुदाय भी बहुतायत में है। ऐसे में सामाजिक समीकरण साधना बेहद जरूरी है। हालांकि पार्टी का मानना है कि द्रोपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद उसे आदिवासी समुदाय में व्यापक समर्थन मिलेगा। लेकिन, पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने वाले कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभाव क्षेत्र में सेंध लगाने के लिए उसके पास कोई बड़ा नेता नहीं है। ऐसे में उसकी निर्भरता केंद्रीय नेतृत्व पर काफी ज्यादा बढ़ी हुई है।
2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस की सरकार बनी थी, लेकिन अब कांग्रेस केवल छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ही सत्ता में है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में हुई टूट के बाद भाजपा ने वहां पर अपनी सरकार बना ली है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा को विभिन्न स्तरों से जो अनुमान मिले हैं, उनके अनुसार छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश उसके लिए काफी कठिनाई भरे हो सकते हैं। मध्य प्रदेश में हाल में स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा को को झटका भी लगा है। छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार को बीते चार साल में कोई बड़ी चुनौती नहीं दे सकी है। भाजपा वहां पर प्रभावी नेतृत्व के संकट से भी जूझ रही है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए अपनी अलग रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके तहत पार्टी ने पूर्वोत्तर में संगठन में काम कर रहे अजय जामवाल को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का क्षेत्रीय संगठन मंत्री नियुक्त किया है और उनका केंद्र रायपुर रखा गया है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में भाजपा ने सवा साल बाद ही अपनी सरकार बना ली थी, क्योंकि कांग्रेस में ज्योतिराज सिंधिया के नेतृत्व में बड़ी टूट होने से कमलनाथ सरकार का पतन हो गया था। उसके बाद भाजपा को हाल में नगर निगम और स्थानीय निकाय के चुनाव में काफी झटका भी लगा है, जबकि 16 में से 5 नगर निगम के मेयर उसके हाथ से निकल गए। इनमें ग्वालियर चंबल क्षेत्र भी शामिल है, जहां उसके कई दिग्गज नेता हैं। इसके अलावा महाकौशल में भी उसे झटका लगा है, जो कांग्रेस नेता कमलनाथ का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।
भाजपा के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से भी ज्यादा मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि वहां पर कांग्रेस की सरकार को बीते 4 साल में पार्टी कोई चुनौती देती हुई नहीं दिखी है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का पहले पहले जैसा प्रभाव नहीं रहा, लेकिन इस बीच भाजपा कोई नया नेतृत्व भी नहीं उभार सकी है। राज्य की लगभग आधी आबादी पिछड़ा वर्ग की है, लेकिन यहां पर आदिवासी समुदाय भी बहुतायत में है। ऐसे में सामाजिक समीकरण साधना बेहद जरूरी है। हालांकि पार्टी का मानना है कि द्रोपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद उसे आदिवासी समुदाय में व्यापक समर्थन मिलेगा। लेकिन, पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने वाले कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभाव क्षेत्र में सेंध लगाने के लिए उसके पास कोई बड़ा नेता नहीं है। ऐसे में उसकी निर्भरता केंद्रीय नेतृत्व पर काफी ज्यादा बढ़ी हुई है।



Journalist खबरीलाल.jpeg)














