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छत्तीसगढ post authorJournalist खबरीलाल LAST UPDATED ON:Thursday ,August 07,2025

Chhattisgarh (खबरीलाल न्यूज़) : पं. रवि शंकर शुक्ल की जयंती सेक्टर-9 में पुष्पाजंलि सभा का आयोजन:

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भिलाई। अविभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं जननेता पंडित रविशंकर शुक्ल की जयंती 2 अगस्त के अवसर पर भिलाई के सेक्टर-9 स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सेक्टर-9 के सम्मुख स्थापित पं. रविशंकर शुक्ल की प्रतिमा के समक्ष प्रातः 9.30 बजे जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। 2 अगस्त को ही पं.रविशंकर शुक्ल के सबसे छोटे पुत्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री और दिग्गज राजनीतिज्ञ स्व. विद्याचरण शुक्ल की भी जयंती है। पिता और पुत्र का जन्मदिन एक ही दिन होना भी एक संयोग है। झीरमघाटी में शहीद हुए पं. विद्याचरण शुक्ल को भी इस अवसर पर श्रृद्धांजलि अर्पित की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना में पंडित रविशंकर शुक्ल ने आधारभूत भूमिका निभाई थी। पं. जगन्नाथ शुक्ल एवं श्रीमती तुलसी देवी के पुत्र के रूप 2 अगस्त, 1876 में सागर में जन्में पं. रविशंकर शुक्ल बचपन से ही मेघावी रहे। उनकी प्राथमिक शिक्षा सागर में ही हुईं। व्यवसाय के कारण पिता श्री जगन्नाथ शुक्ल के छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में आ जाने के कारण पं. शुक्ल ने अपनी मिडिल स्कूल की शिक्षा राजनांदगांव से शुरू की। कुछ ही समय बाद पिता के रायपुर आने से पं. शुक्ल ने अपनी शिक्षा रायपुर में जारी रखी। जबलपुर के राबिनसन काॅलेज से इंटरमिडियेट और नागपुर के हिसलाॅप काॅलेज से शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही युवा पं. शुक्ल कांग्रेस के आंदोलन से प्रभावित हो गये थे। 1899 में 22 वर्ष की उम्र में पं. शुक्ल स्नातक हो गये।

1898 में अमरावती में हुए कांग्रेस के 13 अधिवेशन में पं. शुक्ल ने अपने शिक्षक के साथ भाग लिया और देश के अनेक तत्कालीन महानायकों के संपर्क में आये। यही से पं. शुक्ल की राजनैतिक जीवन और आजादी के आंदोलन की यात्रा प्रारंभ हुई। 50 वर्ष के अपने राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन में पं. शुक्ल ने अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास, शिक्षा और आधारभूत संरचनाओं की स्थापना के लिये महत्वपूर्ण और स्मरणीय कार्य किये। पूर्व सी पी एवं बरार तथा अविभाजित मध्य प्रदेश के विकास में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जायेगा। पं. रविशंकर शुक्ल ने 31 दिसम्बर, 1956 में 80 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली में अंतिम सांस ली।
देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना के सशक्त पक्षधर और आधारभूत भूमिका निभाने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल की जयंती के अवसर पर इस्पात नगरी भिलाई की इस्पात बिरादरी द्वारा जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। इस समारोह का आयोजन संयंत्र के क्रीडा एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है।
पं रवि शंकर शुक्ल सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति के महासचिव श्री मनोज मिश्रा और जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग की अध्यक्ष श्री मुकेश चंद्राकर, ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने सभी कांग्रेसजनों से अनुरोध किया है कि पं. रवि शंकर शुक्ल और स्व. विद्या भैय्या की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में उपस्थित होकर अग्रज नेता का स्मरण कर उन्हें अपनी पुष्पांजंलि अर्पित करें।




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भिलाई। अविभाजित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं जननेता पंडित रविशंकर शुक्ल की जयंती 2 अगस्त के अवसर पर भिलाई के सेक्टर-9 स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सेक्टर-9 के सम्मुख स्थापित पं. रविशंकर शुक्ल की प्रतिमा के समक्ष प्रातः 9.30 बजे जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। 2 अगस्त को ही पं.रविशंकर शुक्ल के सबसे छोटे पुत्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री और दिग्गज राजनीतिज्ञ स्व. विद्याचरण शुक्ल की भी जयंती है। पिता और पुत्र का जन्मदिन एक ही दिन होना भी एक संयोग है। झीरमघाटी में शहीद हुए पं. विद्याचरण शुक्ल को भी इस अवसर पर श्रृद्धांजलि अर्पित की जायेगी।

उल्लेखनीय है कि देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना में पंडित रविशंकर शुक्ल ने आधारभूत भूमिका निभाई थी। पं. जगन्नाथ शुक्ल एवं श्रीमती तुलसी देवी के पुत्र के रूप 2 अगस्त, 1876 में सागर में जन्में पं. रविशंकर शुक्ल बचपन से ही मेघावी रहे। उनकी प्राथमिक शिक्षा सागर में ही हुईं। व्यवसाय के कारण पिता श्री जगन्नाथ शुक्ल के छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में आ जाने के कारण पं. शुक्ल ने अपनी मिडिल स्कूल की शिक्षा राजनांदगांव से शुरू की। कुछ ही समय बाद पिता के रायपुर आने से पं. शुक्ल ने अपनी शिक्षा रायपुर में जारी रखी। जबलपुर के राबिनसन काॅलेज से इंटरमिडियेट और नागपुर के हिसलाॅप काॅलेज से शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही युवा पं. शुक्ल कांग्रेस के आंदोलन से प्रभावित हो गये थे। 1899 में 22 वर्ष की उम्र में पं. शुक्ल स्नातक हो गये।

1898 में अमरावती में हुए कांग्रेस के 13 अधिवेशन में पं. शुक्ल ने अपने शिक्षक के साथ भाग लिया और देश के अनेक तत्कालीन महानायकों के संपर्क में आये। यही से पं. शुक्ल की राजनैतिक जीवन और आजादी के आंदोलन की यात्रा प्रारंभ हुई। 50 वर्ष के अपने राजनैतिक एवं सामाजिक जीवन में पं. शुक्ल ने अनेक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास, शिक्षा और आधारभूत संरचनाओं की स्थापना के लिये महत्वपूर्ण और स्मरणीय कार्य किये। पूर्व सी पी एवं बरार तथा अविभाजित मध्य प्रदेश के विकास में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जायेगा। पं. रविशंकर शुक्ल ने 31 दिसम्बर, 1956 में 80 वर्ष की उम्र में नई दिल्ली में अंतिम सांस ली।
देश के सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र की भिलाई में स्थापना के सशक्त पक्षधर और आधारभूत भूमिका निभाने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल की जयंती के अवसर पर इस्पात नगरी भिलाई की इस्पात बिरादरी द्वारा जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। इस समारोह का आयोजन संयंत्र के क्रीडा एवं सांस्कृतिक समूह द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है।
पं रवि शंकर शुक्ल सामाजिक एवं सांस्कृतिक समिति के महासचिव श्री मनोज मिश्रा और जिला कांग्रेस कमेटी, दुर्ग की अध्यक्ष श्री मुकेश चंद्राकर, ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर ने सभी कांग्रेसजनों से अनुरोध किया है कि पं. रवि शंकर शुक्ल और स्व. विद्या भैय्या की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में उपस्थित होकर अग्रज नेता का स्मरण कर उन्हें अपनी पुष्पांजंलि अर्पित करें।




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