जहानाबाद : बिहार के जहानाबाद की रहने वाली लड़की का सपना डॉक्टर बनने का था. वो पटना के कंकड़बाग स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल/NEET की तैयारी कर रही थी. नए साल के बाद 5 जनवरी को वह हॉस्टल लौटी. फिर 6 जनवरी को वह हॉस्टल में बेहोश अवस्था में पाई गई और उसे आनन‑फानन में एक निजी अस्पताल ले जाया गया. लगातार 5 दिन जीवन-मृत्यु से जूझने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई.
प्रशासन का शुरुआती रुख बनाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट - इस घटना सामने आते ही पटना पुलिस/प्रशासन की ओर से साफ कहा गया कि “रेप या यौन उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई.” यह दावा पटना SSP/ASP स्तर तक भी दोहराया गया. मगर 14 जनवरी को आई पोस्टमार्टम ने पूरा का पूरा मामला ही पलट दिया. रिपोर्ट में जिक्र है कि “sexual violence cannot be ruled out” यानी यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता. इस एक प्वाइंट ने प्रशासन के शुरुआती दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया और केस को नए मोड़ पर ला दिया
परिवार की पीड़ा और आरोप - लड़की के भाई ने बताया कि 6 जनवरी को हॉस्टल/अस्पताल से तबीयत बिगड़ने की सूचना आई थी. शुरुआत में डॉक्टरों ने “सर्दी” बताकर आश्वस्त किया, पर मुलाक़ात से रोक दिया गया. मगर 9 जनवरी को रेफर करने की बात कही गई, तब परिवार उसे मेदांता ले गया जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति/कम बचाव संभावना बताई.
जहानाबाद : बिहार के जहानाबाद की रहने वाली लड़की का सपना डॉक्टर बनने का था. वो पटना के कंकड़बाग स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल/NEET की तैयारी कर रही थी. नए साल के बाद 5 जनवरी को वह हॉस्टल लौटी. फिर 6 जनवरी को वह हॉस्टल में बेहोश अवस्था में पाई गई और उसे आनन‑फानन में एक निजी अस्पताल ले जाया गया. लगातार 5 दिन जीवन-मृत्यु से जूझने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई.
प्रशासन का शुरुआती रुख बनाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट - इस घटना सामने आते ही पटना पुलिस/प्रशासन की ओर से साफ कहा गया कि “रेप या यौन उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई.” यह दावा पटना SSP/ASP स्तर तक भी दोहराया गया. मगर 14 जनवरी को आई पोस्टमार्टम ने पूरा का पूरा मामला ही पलट दिया. रिपोर्ट में जिक्र है कि “sexual violence cannot be ruled out” यानी यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता. इस एक प्वाइंट ने प्रशासन के शुरुआती दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया और केस को नए मोड़ पर ला दिया
परिवार की पीड़ा और आरोप - लड़की के भाई ने बताया कि 6 जनवरी को हॉस्टल/अस्पताल से तबीयत बिगड़ने की सूचना आई थी. शुरुआत में डॉक्टरों ने “सर्दी” बताकर आश्वस्त किया, पर मुलाक़ात से रोक दिया गया. मगर 9 जनवरी को रेफर करने की बात कही गई, तब परिवार उसे मेदांता ले गया जहां डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति/कम बचाव संभावना बताई.



Journalist खबरीलाल














