नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को होना है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में 5 से 6 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं, जिनकी वैधता संदिग्ध हो सकती है। पार्टी ने इस मुद्दे को सीधे सुप्रीम कोर्ट में उठाया।
पार्टी ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने टीएमसी की मांग को तुरंत खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इस तरह की याचिका नहीं सुन सकते। बिना ठोस दस्तावेज के केवल मौखिक अनुरोध पर कोर्ट कार्रवाई नहीं करेगा। कोर्ट ने इसे बिना ठोस आधार के जांच की मांग बताया। कहा कि किसी भी आरोप के समर्थन में ठोस सबूत और दस्तावेज जरूरी हैं।
टीएमसी की ओर से कहा गया कि फिलहाल उनके पास केवल मीडिया रिपोर्ट्स हैं। विस्तृत दस्तावेज बाद में पेश किए जा सकते हैं। अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक अपील को साफ तौर पर सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोपों पर सुनवाई संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव जैसे संवेदनशील मामलों में पुख्ता सबूत के बिना कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को होना है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में 5 से 6 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं, जिनकी वैधता संदिग्ध हो सकती है। पार्टी ने इस मुद्दे को सीधे सुप्रीम कोर्ट में उठाया।
पार्टी ने कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने टीएमसी की मांग को तुरंत खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की बेंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हम इस तरह की याचिका नहीं सुन सकते। बिना ठोस दस्तावेज के केवल मौखिक अनुरोध पर कोर्ट कार्रवाई नहीं करेगा। कोर्ट ने इसे बिना ठोस आधार के जांच की मांग बताया। कहा कि किसी भी आरोप के समर्थन में ठोस सबूत और दस्तावेज जरूरी हैं।
टीएमसी की ओर से कहा गया कि फिलहाल उनके पास केवल मीडिया रिपोर्ट्स हैं। विस्तृत दस्तावेज बाद में पेश किए जा सकते हैं। अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक अपील को साफ तौर पर सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना प्रमाण के इस तरह के गंभीर आरोपों पर सुनवाई संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव जैसे संवेदनशील मामलों में पुख्ता सबूत के बिना कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।



Journalist खबरीलाल














